हास्य व्यंग्य

1.****मुझको यह विश्वास नही है****
आज सभी हैं पास तुम्हारे कोई मेरे पास नहीं है .
लेकिन कल भी ऐसा होगा मुझको यह विश्वास नहीं है.
तुम चाहो तो चंदा निकले,
तुम चाहो तो सूरज आये.
पवन तुम्हारी अनुमति के बिन,
कोई पत्ता नहीं डुलाये.
आज सभी हैं दास तुम्हारे कोई मेरा दास नहीं है .
लेकिन कल भी ऐसा होगा मुझको यह विश्वास नहीं है.
लिखते लोग प्रशस्ति तुम्हारी,
जगह-जगह पर हों चर्चाएँ.
और तुम्हारे अभिनन्दन में,
आयोजित हों रोज़ सभाएं.
आज सभी हैं खास तुम्हारे कोई मेरा खास नहीं है .
लेकिन कल भी ऐसा होगा मुझको यह विश्वास नहीं है.
चाहें जैसा भी तुम बोलो,
आज सभी हो जाते राजी.
कोई पीसे कोई काटे,
तुम्हीं जीतते हो हर बाज़ी.
आज सभी हैं ताश तुम्हारे कोई मेरा ताश नहीं है .
लेकिन कल भी ऐसा होगा मुझको यह विश्वास नहीं है.
* डॉ.कमलेश द्विवेदी

2.”कौन बनेगा करोड़पति” पर आधारित व्यंग रचना
****** कौन बनेगा करोड़पति ******
कौन बनेगा करोड़पति में एक प्रतिभागी ने
तीन लाख बीस हज़ार रुपये का ईनाम जीत लिया
अमिताभ बच्चन ने उससे अगला प्रश्न किया
अपने पिता जी का नाम बताइए
छः लाख चालीस हज़ार रुपये ले जाइये
इतने सरल से प्रश्न के लिए इतनी बड़ी धनराशि का ईनाम सुनकर
प्रतिभागी का दिमाग झूल गया
वो अपने पिता जी का नाम ही भूल गया
अमिताभ बच्चन से बोला-सर,थोड़ा सहयोग कीजिये
चारों विकल्प बता दीजिये
अमिताभ बच्चन ने चार नाम बताये
फिर भी प्रतिभागी महोदय अपने पिता जी का नाम नहीं बता पाए
सही उत्तर देने के लिए उन्होंने एक्सपर्ट एडवाइस
और आडियंस पोल का इस्तेमाल किया
लेकिन भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया
तो उन्होंने तीसरी लाइफ लाइन-फ़ोन ए फ्रेंड लेकर
अपनी मम्मी को फ़ोन लगाया
ईनाम की धनराशि और चारों नामों के बारे में बताया
फिर मम्मी से बोले-अब आप ही बताइए कि
आपका बेटा इस प्रश्न का उत्तर क्या दे
मम्मी बोली-बेटे,छः लाख चालीस हज़ार रुपये की बात है
कोई भी नाम बता दे
बेटा बोला-मम्मी,इस प्रश्न का उत्तर देते हुए
आप पिता जी से नहीं डर रही हैं
उत्तर का क्या अर्थ निकल रहा है,उस पर विचार नहीं कर रही हैं
मम्मी बोली-बेटे,आज सौ-सौ,पचास-पचास रुपये पर
आदमी अपनी नीयत बदल सकता है
यहाँ तो छः लाख चालीस हज़ार रुपये की बात है
तू क्या,तेरा बाप भी अपनी वल्दियत बदल सकता है
दोस्तों,हम पैसे को जीवन में महत्व तो दें
पर उसके लालच में अपने आपको इतना अधिक मत फंसायें
कि आज हम बाप का नाम भूले हैं
कल अपने आपका नाम भूल जाएँ.
डॉ.कमलेश द्विवेदी
119/427दर्शन पुरवा,कानपुर(उ.प्र.)
पिन.208012
मो.09415474674

3. *****सोच रहे हैं नेता जी****
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
आगे क्या परिणाम दिखेंगे अन्ना जी के अनशन के.
दिल्ली में जो प्लाट लिया है वो कैसे बनवायेंगे.
फारेन में पढ़ते हैं बच्चे फीस कहाँ से लायेंगे.
भ्रष्टाचार न होगा तो हम कितने दिन जी पायेंगे.
पहले चारा खाया हमने अब क्या गोबर खायेंगे.
लगता है अब गयी नौकरी आये दिन सस्पेशन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
सैंतालिस से लेकर अब तक हमने की है मनमानी.
घोटाले वाली दुनिया में कौन हमारा है सानी.
कोई हो सत्ता में लेकिन अपनी चलती सुल्तानी.
पब्लिक भूखी मरती रहती हम खाते हैं बिरियानी.
मगर बदलते दीख रहे हैं तेवर अब जन-गण-मन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
वो दिन दूर नहीं दिखता जब ऐसी स्थिति आएगी-
लोकपाल की जांच हमें सीधे तिहाड़ पहुंचाएगी.
जाग चुकी है पब्लिक भी अब हमको नहीं छुड़ाएगी.
लाख मुकदमा लड़ लें लेकिन बेल नहीं हो पायेगी.
सारी उम्र बितानी होगी फिर हमको कैदी बनके.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
बात-बात पर नेता जी अब जाने क्यों झल्लाते हैं.
बीबी-बच्चे,नौकर-चाकर कुछ भी समझ न पाते हैं.
लेकिन कारण हमें पता है वो हम आज बताते हैं.
“मैं अन्ना हूँ”वाले नारे उनकी नींद उड़ाते हैं.
अक्सर सपने में दिख जाते दृश्य उसी आन्दोलन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
उनको चारों तरफ नज़र हरदम आते हैं अन्ना जी.
अन्ना-टोपी उनके सर पर रख जाते हैं अन्ना जी.
“अभी लडाई जीती आधी”बतलाते हैं अन्ना जी.
सोते-जगते तरह-तरह से डरवाते हैं अन्ना जी.
कैसे कहें किसी से ये सब लक्षण हैं पागलपन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
** डॉ.कमलेश द्विवेदी
११/४२७ दर्शन पुरवा
कानपुर-२०८०१२
मो.९४१५४७४६७४

4. ******* आरती खद्दरधारी की *******
आरती खद्दरधारी की-वोट के सफल भिखारी की
आरती खद्दरधारी की-वोट के सफल भिखारी की
गले में स्वागत की माला
अधर पर मधुरस का प्याला
ह्रदय में हैं बरछी-भाला
स्वरों की गमक-फेस की चमक -चाल की धमक
और रुतबे सरकारी की -आरती खद्दरधारी की
न कोई काम करें सच्चा
दे रहे पब्लिक को गच्चा
ठगाई में सबके चच्चा
घोटालानंद-नित्य छलछंद-करें निर्द्वंद्व
फ़िक्र बस कुर्सी प्यारी की-आरती खद्दरधारी की
इन्हीं से प्रकट होंय दंगा
इन्हीं से होय शांति- भंगा
कौन फिर इनसे ले पंगा
क्रिमिनलों संग-करें हुडदंग-लोग हैं तंग
जिता कर गलती भारी की-आरती खद्दरधारी की
चमन के ऐसे ये माली
बेच कर फूल-फल-डाली
चमन ही कर देते खाली
ह्वाईट अम्बरम-ब्लैक सब करम-परम बेशरम
राजनीतिक व्यापारी की-आरती खद्दरधारी की
प्यास के मारे हम तरसें
मगर ये कहीं नहीं दरसें
चुनावी मौसम में बरसें
हमारे बीच-ऊँच प्लस नीच-भाव को सींच
प्यार की नदिया खारी की-आरती खद्दरधारी की
जो गाये यह आरती भ्रष्ट चरण चित लाय
ठेका-परमिट-राशनिंग उसे शीघ्र मिल जाय
कहो नेता महान की जय
भ्रष्टवर बेईमान की जय
हमारे संविधान की जय
देश हिन्दोस्तान की जय
और जय अपनी लाचारी की-आरती खद्दरधारी की
आरती खद्दरधारी की-वोट के सफल भिखारी की .
डॉ.कमलेश द्विवेदी
११९/४२७ दर्शन पुरवा
कानपुर-२०८०१२
मो.०९४१५४७४६७४

5. *****सोच रहे हैं नेता जी****
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
आगे क्या परिणाम दिखेंगे अन्ना जी के अनशन के.
दिल्ली में जो प्लाट लिया है वो कैसे बनवायेंगे.
फारेन में पढ़ते हैं बच्चे फीस कहाँ से लायेंगे.
भ्रष्टाचार न होगा तो हम कितने दिन जी पायेंगे.
पहले चारा खाया हमने अब क्या गोबर खायेंगे.
लगता है अब गयी नौकरी आये दिन सस्पेशन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
सैंतालिस से लेकर अब तक हमने की है मनमानी.
घोटाले वाली दुनिया में कौन हमारा है सानी.
कोई हो सत्ता में लेकिन अपनी चलती सुल्तानी.
पब्लिक भूखी मरती रहती हम खाते हैं बिरियानी.
मगर बदलते दीख रहे हैं तेवर अब जन-गण-मन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
वो दिन दूर नहीं दिखता जब ऐसी स्थिति आएगी-
लोकपाल की जांच हमें सीधे तिहाड़ पहुंचाएगी.
जाग चुकी है पब्लिक भी अब हमको नहीं छुड़ाएगी.
लाख मुकदमा लड़ लें लेकिन बेल नहीं हो पायेगी.
सारी उम्र बितानी होगी फिर हमको कैदी बनके.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
बात-बात पर नेता जी अब जाने क्यों झल्लाते हैं.
बीबी-बच्चे,नौकर-चाकर कुछ भी समझ न पाते हैं.
लेकिन कारण हमें पता है वो हम आज बताते हैं.
“मैं अन्ना हूँ”वाले नारे उनकी नींद उड़ाते हैं.
अक्सर सपने में दिख जाते दृश्य उसी आन्दोलन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
उनको चारों तरफ नज़र हरदम आते हैं अन्ना जी.
अन्ना-टोपी उनके सर पर रख जाते हैं अन्ना जी.
“अभी लडाई जीती आधी”बतलाते हैं अन्ना जी.
सोते-जगते तरह-तरह से डरवाते हैं अन्ना जी.
कैसे कहें किसी से ये सब लक्षण हैं पागलपन के.
सोच रहे हैं नेता जी-अब आये हैं दिन टेंशन के.
** डॉ.कमलेश द्विवेदी
११/४२७ दर्शन पुरवा
कानपुर-२०८०१२
मो.९४१५४७४६७४

6.****सर घुटने से पहले ****
बड़े सर की टेबिल पे जाने से पहले.
निपट लो फलाने-फलाने से पहले.
नियम से चलो है ये सरकारी दफ़्तर.
खिलाना पड़ेगा ही खाने से पहले.
शहर में पुलिस की कड़ी चौकसी है.
मैं खुद लुट गया जस्ट थाने से पहले.
बुढ़ापे में शादी रचाई है तुमने.
खड़ी कर ली खटिया बिछाने से पहले.
पिताजी ये बोले-घटाना सरल है.
मगर कुछ तो जोड़ो घटाने से पहले.
जो डैडी के मरने पे रोया नहीं वो.
सुबकने लगा सर घुटाने से पहले.

7.****नाच नचाया करता है ****
हर कोई उससे घबराया करता है.
वो लफ़्ज़ों के तीर चलाया करता है.
उसकी कमियां मैं दिल में रख लेता हूँ.
पर वो मेरी सबसे गाया करता है.
कौन करेगा आसानी से उसपे यकीं.
वो लत्ते का सांप बनाया करता है.
वो बस्ती में हो चाहे वीराने में.
ग़ुल अपनी खुशबू फैलाया करता है.
गंगा मैया पाप सभी धो देतीं हैं.
इस कारण वो रोज़ नहाया करता है.
लगता है कुछ हो के रहेगा बस्ती में.
वो अक्सर ही आया-जाया करता है.
सबसे जो कुछ कहता मेरे बारे में.
मुझसे कहने में शर्माया करता है.
कह तो देते लोग अक्सर भावुकता में.
जीवन भर संग कौन निभाया करता है.
पहले जिसने मुझसे सब कुछ समझा था.
अब वो मुझको ही समझाया करता है.
सबसे बड़ा कोरियोग्राफर वो ही है.
जो दुनिया को नाच नचाया करता है.

8. **** छोड़ दें क्या****
लेना रिश्वत छोड़ दें क्या.
उसकी नेमत छोड़ दें क्या.
बारगेनिंग इतनी ज्यादा.
पूरी कीमत छोड़ दें क्या.
मुफ्त वो मुझको पिलाता.
उसकी सोहबत छोड़ दें क्या.
फंस गया है आज मुर्गा.
अब सलामत छोड़ दें क्या.
एज थोड़ी बढ़ गयी है.
तो मोहब्बत छोड़ दें क्या.
जो मिला दौलत बदौलत.
माबदौलत छोड़ दें क्या.
लें क़सम सच बोलने की.
हम वक़ालत छोड़ दें क्या.
जिससे कोठी-कार-इज्ज़त.
वो सियासत छोड़ दें क्या.


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s