दोहा

    1.पिता गये परिवार को देकर यह संत्रास.
    उनके सँग ही उठ गया आपस का विश्वास.
    2.देखा जब व्यवहार तो हुआ बहुत ही खेद.
    माँ भी अब करने लगी संतानों में भेद.
    3. गैरों में अपने मिले अपनों में कुछ गैर.
    किसस रक्खें दोस्ती किससे रक्खें बैर.
    4. साथी होकर भी कभी नहीं रहें इक ठौर.
    तन की मंजिल और है मन की मंजिल और.
    5. वक्त बड़ा बलवान है सब कुछ उसके हाथ.
    मेरी क्या औकात है तेरी क्या औकात.
    6.जबसे पावस ऋतु लगी घिरी घटा घनघोर.
    पर तुमको देखे बिना क्यों नाचे मनमोर.
    7.मुरलीधर मधुराधिपति माधव मदनकिशोर.
    मेरे मन मन्दिर बसो मोहन माखनचोर.
    8.तेरे स्वर ने कर दिये झंकृत मन के तार.
    प्यार-प्यार ही गूँजता मन में बारम्बार.
    9.आज दिवस सूना लगा हुई न तुमसे बात.
    मेरा मन भीगा नहीं लाख हुई बरसात.
    10.तुमसे जब बातें करूँ ऐसा मिले सुकून.
    जैसे कोई जून में पहुँचे देहरादून.
    11.तुम गजलों की प्रेरणा तुम गीतों के प्राण.
    तुमसे मिलकर मोम सा हुआ हृदय पाषाण.
    12.चंदा से चाँदी मिली सूरज से भी स्वर्ण.
    इन दोनों से है बना तेरा सुन्दर वर्ण.
    13.सूरज-चंदा मिल सभी गायें तेरे गीत.
    इसीलिए सबसे अलग तू है मेरा मीत.
    14.धागा जोड़ो प्रेम का लगा प्रेम की गाँठ.
    गाँठ जोड़ने से जुड़े सात जनम का साथ.
    15.दिल की कह पाया नहीं परेशान था व्यर्थ.
    तुमने मेरे मौन का सही लगाया अर्थ.
    16.याद किया तुमने मुझे पाया यह पैगाम.
    सचमुच ही उस दिन लगी मुझे सुहानी शाम.
    17.वही भरोसा गैर पर कर सकता है खास.
    जिसको अपने आप पर होता है विश्वास.
    18.तुम जीवन में आ गये बदल गया परिवेश.
    साधारण से मैं हुआ कितना आज विशेष.
    19.पूरे मन से दी मुझे उसने अपनी प्रीत.
    मैं लिख पाया हूँ तभी दोहे-गजलें-गीत.
    20.जिस पल मेरे साथ तुम उस पल की क्या बात.
    दिवस सुहाना है दिवस रात सुहानी रात.
    21.आँख किसी को झील सी लगी किसी को जाम.
    जो जैसा डूबा दिया उसने वैसा नाम.
    22.जिसने मुझको आज दी है बिछुड़न की आह.
    वही निकालेगा कभी पुनर्मिलन की राह.
    23.नैन कटारी से लगे और किसी को तीर.
    अपनी-अपनी चोट है अपनी-अपनी पीर.
    24.आया कितनी बार ही अश्कों का सैलाब.
    बचा लिये मैंने मगर अपने सारे ख्वाब.
    25.सुबह दोपहर शाम क्या सारी-सारी रात.
    करूँ तुम्हारी बात पर ख़त्म न होती बात.
    26.लाख दूर हो आज तुम पर हो दगिल के पास.
    कल न रहेंगी दूरियाँ मुझको है विश्वास.
    27.तुम ही मेरी आस हो तुम ही हो विश्वास.
    तुम ही मेरी तृप्ति हो तुम ही मेरी प्यास.
    28.जिन राहों पर कल चला था वो मेरे साथ.
    वो करती हैं आज भी मुझसे उसकी बात.
    29.दिल की फाइल में लिखे मैंने कुछ अहसास.
    वो कर दे साइन तभी फाइल होगी पास.
    30.तेरे-मेरे साथ का एक अलग आनन्द.
    तू मेरी कविता प्रिये मैं हूँ तेरा छन्द.
    31.दिखे समस्या हर तरफ कहीं न दिखता अंत.
    गण बेचारा सोचा-यह कैसा गणतंत्र.
    32.जितनी उसमें खूबियाँ उतने मुझमें दोष.
    पर न दिखाता वो कभी मुझ पर अपना रोष.
    33.तुझसे मिलने की मचे तन-मन में जब होड़.
    मन पहले जाये पहुँच तन को पीछे छोड़.
    34.कब तक हो सकता भला रिश्तों का निर्वाह.
    हम करते हैं आह तो वे करते हैं वाह.
    35.अब न रहीं वे चिट्ठियाँ अब न रहे वे तार.
    जिनको पाने दौड़ता था सारा परिवातकर.
    36.पूजा और अजान तुम गीता और कुरान.
    मैं उसको खोजूँ कहाँ तुम्हीं राम-रहमान.
    37.बौर आम पर आ गये कलियाँ खिलीं अनन्त.
    फूली सरसों कह रही-लो आ गया बसन्त.
    38.देख रहा था ख्वाब में वो नभ का आनन्द.
    तभी किसी ने कर दिया आकर पिंजरा बन्द.
    39.बार-बार नभ देखकर अब वो करे विचार-
    खुला मिलेगा क्या कभी फिर पिंजरे का द्वार.
    40.उनसे दो बातें हुईं बदल गये अहसास.
    कानों में मिसरी घुली मन में घुली मिठास.
    41.मधुॠतु पाई फूल ने सुख-दुःख से भरपूर.
    तितली पल भर को मिली चली गयी फिर दूर.
    42.इक-दूजे से है नहीं हमको कुछ दरकार.
    तेरे-मेरे बीच में फिर कैसी दीवार.
    43.हम दिन में ट्रेवल करें रातों में प्रोग्राम.
    कहीं गुजरती है सुबह कहीं गुजरती शाम.
    44.उसकी बातों से मुझे मिलता यों आनन्द.
    मन करता है वो कभी करे न बातें बन्द.
    45.वैसे तो तुमसे मिले अभी न बीती रात.
    पर लगता वर्षों हुये हुई न तुमसे बात.
    46.कदम रखूँ इस ठौर तो पड़ते हैं उस ठौर.
    तन की गति कुछ और है मन की गति कुछ और.
    47.कभी प्यार में तृप्ति का हो न सके अहसास.
    जितनी-जितनी तृप्ति हो उतनी बढती प्यास.
    48.माना अब तक की नहीं कोई नदिया पार.
    पार करूँगा सिंथु मैं इतना है एतबार.
    49.कोई करे विरोध तो कभी न करिये क्रोध.
    जितनी हों उपलब्धियाँ उतना बढ़े विरोध.
    50.खुला मिला पिंजरा मगर उड़ न सका वो आज.
    वर्षों पिंजरे में रहा भूल गया परवाज.
    51.ना गुलाब सी गंध है ना वैसा मकरंद.
    फिर कनेर क्यों कर उसकी तरह घमंड.
    52.यों तुलना मे सिंधु की दिखे लघुत्तम बिंदु.
    मगर समाकर सिंधु में बिंदु बने खुद सिंधु.
    53.जब अपना विश्वास ही होगा यों कमजोर.
    फिर होगी मजबूत क्यों सम्बन्धों की डोर.
    54.सबसे ज्यादा खास जो वो तोड़ेगा आस.
    बोलो कैसे कर लिया तुमने यह विश्वास.
    55.जब भी कोई देखता केवल अपना लाभ.
    टूटा करते हैं तभी लाभों वाले ख्वाब.
    56.लगीं एक-दो ठोकरें मगर बच गया काँच.
    बार-बार मत कीजिये मजबूती की जाँच.
    57.देख रहा हूँ रास्ता कबसे तेरा यार.
    ख्वाबों में फिर क्यों करूँ मैं तेरा दीदार.
    58.मीठे-मीठे बोल ही हरदम बोलें प्लीज़.
    इस मीठे से ना कभी होती डाइबिटीज.
    59.”आता हूँ” कहकर गया मुझसे मेरा यार.
    जनम-जनम से मैं रहा उसकी राह निहार.
    60.दसों दिशाओं मे दिखें रावण के दस शीश.
    एक बाण से काट दो तुम इनको जगदीश.
    61.दोहा चौपाई गजल गीत सवैया छन्द.
    कविता की हर इक विधा का तुझमें आनन्द.
    62.इक-दूजे के ख्वाब से हम करते हैं प्यार.
    इसीलिये हमको यकीं वे होंगे साकार.
    63.किसी व्यक्ति या टिप्पणी से मत हों गमगीन.
    बिना आपकी प्रतिक्रिया दोनों शक्तिविहीन.
    64.सूखे के सँग बाढ़ क्या देखी है इक साथ.
    तुम बिन चेहरा जर्द है आँखों में बरसात.
    65.तुम गीतों के संकलन मैं छोटा सा गीत.
    किसी पृष्ठ पर कुछ जगह मुझको दो दो मीत.
    66.प्रियतम तेरे प्यार का यह मधुमय परिणाम.
    नाम किसी का लूँ मगर निकले तेरा नाम.
    67.कब आयेगा पूछते मुझसे सौ-सौ बार.
    तेरा रस्ता देखते देहरी-आँगन-द्वार.
    68.इधर-उधर झलके कभी फिर वो जाये डूब.
    लुका-छिपी का खेल भी चंदा खेले खूब.
    69.ना पहले से दिन रहे ना पहले सी रात.
    ना पहले सा मौन है ना पहले सी बात.
    70.वो किससे कैसे कहे अपने मन की पीर.
    है न गले में अब पड़ी पैरों में जंजीर.
    71.अच्छी होती रात भी चाहे हो घनघोर.
    जाते-जाते वो हमें दे जाती है भोर.
    72.तट कब तक सहता भला मर्यादा का बोझ.
    कट-कट कर गिरने लगा वो नदिया में रोज.
    73.जिससे मिलनी थी मुझे सपनों की सौगात.
    वो ही नींदें ले गया जागूँ सारी रात.
    74.वीणा तो अब भी वही टूट गये कुछ तार.
    पहले जैसी किस तरह होगी फिर झंकार.
    75.काश जगे दिल में वही पहले सा अहसास.
    जैसे पहले पास थे वैसे हों हम पास.
    76.आज किसी ने इस तरह डाँटा पहली बार.
    मुझे लगा कोई मुझे भी करता है प्यार.
    77.जितनी उसमें खूबियाँ उतने मुझमें दोष.
    पर न दिखाये वो कभी मुझ पर अपना रोष.
    78.दोनों की आँखें भरी छलक उठा है नीर.
    शब्दों में कैसे कहें अन्तरमन की पीर.
    79.बढ़ा रहे हैं हम स्वयं ऊँचाई हर बार.
    कैसे टूटेगी कभी आँगन की दीवार.
    80.तेरा बंधन और से लगे हमेशा खास.
    इस बंधन में मुक्ति का सदा रहे अहसास.
    81.ऐ दिल जो तुझको करे बार-बार मायूस.
    बार-बार तू क्यों करे उसको ही महसूस.
    82.इससे अधिक यकीन की क्या होगी तौहीन.
    जब मैंने खाई कसम उसने किया यकीन.
    83.पर दिल कहता मत समझ तू इसको तौहीन.
    तेरी कसमों पर अभी तक है उसे यकीन.
    84.यादों की तितली गई फिर फूलों के पास.
    फिर मन में जागा वही बासंती अहसास.
    85.उतर गया तत्काल ही प्रेम-ज्वार का ताप.
    सूर्यमुखी सा जब दिखा चन्द्रमुखी का बाप.
    86.लगता दिल में है कहीं कोई बात जरूर.
    वरना होकर पास क्यों लगते हैंंहम दूर.
    87.मर्यादायें तोड़ता तो होता बदनाम.
    इसीलिये टूटा स्वयं पल-पल आठों याम.
    88.बन्धन में आनन्द का पल-पल हो अहसास.
    जिसमें बाँधे प्यार से अपना कोई खास.
    89.ना कहने को खास कुछ ना सुनने को खास.
    फिर क्यों रहता दिल सदा तेरो बिना उदास.
    90.ग्यानदायिनी माँ मुझे दे तू ऐसा ग्यान.
    सब मानें मैया मुझे तेरी ही संतान.
    91.दिलवर के दिल का जिसे हो जाता दीदार.
    कैसे मैं उस प्यार को अंधा मानूँ यार.
    92.उसकी खातिर आम क्या उसकी खातिर खास.
    सबका मालिक एक हैं सब हैं उसके दास.
    93.बेटी को करके विदा क्या होता संताप.
    बेटी को करके विदा ही समझेंगे आप.
    94.जिस दिन मैं करता रहा बस चंदा की बात.
    रही चाँदनी रात भर उस दिन मेरे साथ.
    95.धरती जितना पास है अम्बर जितना दूर.
    प्यार एक अहसास है सुख-दुख से भरपूर.
    96.मन पर उसके प्यार का छाया यों आनन्द.
    कड़ी धूप में छाँव पर हमने लिखा निबन्ध.
    97.उड़ने दो आकाश में पायेगा विस्तार.
    पिंजरे में जो रख दिया क्या पनपेगा प्यार.
    98.इधर-उधर भटके नहीं पल भर मेरा ध्यान.
    जब-जब कान्हा छेड़ता है मुरपली की तान.
    99.इसे निरन्तर अर्ध्य दो कभी न हो कुछ चूक.
    बिरवा अपने प्यार का कहीं न जाये सूख.
    100.सोच रही थी प्यास जब मैं ले लूँ सन्यास.
    तभी दौड़कर आ गया बादल उसके पास.
    101.काम अगर पूजा बने गा उठते पाषाण.
    खजुराहो से मन्दिरों का होता निर्माण.
    102.उसने सच्ची बात पर किया नहीं विश्वास.
    मैंने बोला झूठ तो मुझको माना खास.
    103.ना तो कोई मित्र है ना ही रिश्तेदार.
    जैसा जिसका स्वार्थ है वैसा है व्यवहार.
    104.तुमसे मिलने का सदा होता यह परिणाम.
    साधारण सा शाम भी लगे सुहानी शाम.
    105.गलती करके माँगता माफी भी हर बार.
    गुस्सा भी आता मुझे आता उस पर प्यार.
    106.जिसने घर को जन्म भर दिया पसीना-खून.
    घर के बाहर खोजता वो ही आज सुकून.
    107.मैं विनम्रतावश झुका इसे न माने झूठ.
    पर विनम्रता और की तो जाऊँगा टूट.
    108.पैरों में काँटा लगा ठीक हो गया घाव.
    लेकिन जब दिल में चुभा वर्षों रहा प्रभाव.
    109.मन तो कहता तुम मुझे करते दिल से प्यार.
    मगर कान भी चाहते हैं सुनना इक बार.
    110.सूख रहे थे खेत जब तुमने दी जलधार.
    अब फसलों पर क्यों करी ओलों की बौछार.
    111.प्यार कभी घटता नहीं रहता सदाबहार.
    रहे सामने मीत या सात समन्दर पार.
    112.तनहा होता जब कभी बस तुम आते याद.
    नींद नहीं आती मुझे घंटों उसके बाद.
    113.खोज रहा हूँ प्यार की उस डोरी का छोर.
    जिसे थामकर मैं बढ़ूँ फिर से तेरी ओर.
    114.हम दोनों के बीच में यह कैसा अनुबंध
    खुश हों या नाराज़ हम लिख देते हैं छंद.
    115.फिर यादों में आ गये सारे टूटे ख्वाब.
    आज डायरी में मिला सूखा एक गुलाब.
    116.तुझको क्यों इल्ज़ाम दूँ मेरे दिल के नूर.
    मैंने खुद ही कर लिया खुद को खुद से दूर.
    117.खुद से खुद का द्वंद्व हम देख रहे हैं मौन.
    इन दोनों में क्या पता कब जीतेगा कौन.
    118.मैं तो केवल फूल हूँ तू है मेरी गंध.
    तूने ही मुझमें भरा जीवन का मकरंद.
    119.जब तुम मेरे साथ हो सुबह-दोपहर-शाम.
    हर पल देगा वो मुझे खुशियों के पैगाम.
    120.कर पायेगा गैर पर वही भरोसा खास.
    जिसको अपने आप पर भी होगा विश्वास.

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